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Anvi Srivastava: 20 days ago

एक बार चम्पकलाल ने एक कबूतर का शिकार किया। वह कबूतर जाकर एक खेत में गिरा। जब चम्पकलाल उस खेत में कबूतर को उठाने पहुंचा तभी एक किसान वहां आया और चम्पकलाल को पूछने लगा कि वह उसकी प्रोपर्टी में क्या कर रहा है?

चम्पकलाल ने कबूतर को दिखाते हुए कहा - `मैंने इस कबूतर को मारा और ये मर कर यहाँ गिर गया मैं इसे लेने आया हूँ!`

किसान - `ये कबूतर मेरा है क्योंकि ये मेरे खेत में पड़ा है!`

चम्पकलाल - `क्या तुम जानते हो तुम किससे बात कर रहे हो?`

किसान - `नहीं मैं नहीं जानता और मुझे इससे भी कुछ नहीं लेना है कि तुम कौन हो!`

चम्पकलाल - `मैं हाईकोर्ट का वकील हूँ, अगर तुमने मुझे इस कबूतर को ले जाने से रोका तो मैं तुम पर ऐसा मुकदमा चलाऊंगा कि तुम्हें तुम्हारी जमीन जायदाद से बेदखल कर दूंगा और रास्ते का भिखारी बना दूंगा!`

किसान ने कहा - `हम किसी से नहीं डरते ... हमारे गाँव में तो बस एक ही कानून चलता है... लात मारने वाला!`

चम्पकलाल - `ये कौनसा क़ानून है ... मैंने तो कभी इसके बारे में नहीं सुना!`

किसान ने कहा -`मैं तुम्हें तीन लातें मारता हूँ अगर तुम वापिस उठकर तीन लातें मुझे मार पाओगे तो तुम इस कबूतर को ले जा सकते हो!`

चम्पकलाल ने सोचा ये ठीक है ये मरियल सा आदमी है, इसकी लातों से मुझे क्या फर्क पड़ेगा ! ये सोचकर उसने कहा - `ठीक है मारो!`

किसान ने बड़ी बेरहमी से चम्पकलाल को पहली लात टांगों के बीच में मारी जिससे चम्पकलाल मुहं के बल झुक गया!

किसान ने दूसरी लात चम्पकलाल के मुहं पर मारी जिसके पड़ते ही वह जमीन पर गिर गया!

तीसरी लात किसान ने चम्पकलाल की पसलियों पर मारी।

बड़ी देर बाद चम्पकलाल उठा और जब लात मारने के लायक हुआ तो किसान से बोला - `अब मेरी बारी है!`

किसान - `चलो छोड़ो यार! ये कबूतर तुम ही रखो!
Anvi Srivastava: 20 days ago
अकबर और बीरबल सभा मे बैठ कर आपस में बात कर रहे थे। अकबर ने बीरबल को आदेश दिया कि मुझे इस राज्य से 5 मूर्ख ढूंढ कर दिखाओ। बादशाह का हुक्म सुन बीरबल ने खोज शुरू की।

एक महीने बाद बीरबल वापस आये लेकिन सिर्फ 2 लोगों के साथ।

अकबर: मैने तो 5 मूर्ख लाने के लिये कहा था।

बीरबल: जी हुजुर लाया हूँ, मुझे पेश करने का मौका दिया जाये।

अकबर: ठीक है।

बीरबल: हुजुर यह पहला मूर्ख है। मैने इसे बैलगाडी पर बैठ कर भी बैग सिर पर ढोते हुए देखा और पूछने पर जवाब मिला कि कहीं बैल के उपर ज्यादा भार ना हो जाए, इसलिये बैग सिर पर ढो रहा हूँ। इस हिसाब से यह पहला मूर्ख है।

दूसरा मूर्ख यह आदमी है जो आप के सामने खडा है। मैने देखा इसके घर के ऊपर छत पर घास निकली थी। अपनी भैंस को छत पर ले जाकर घास खिला रहा था। मैने देखा और पूछा तो जवाब मिला कि घास छत पर जम जाती है तो भैंस को ऊपर ले जाकर घास खिला देता हूँ। हुजुर, जो आदमी अपने घर की छत पर जमी घास को काटकर फेंक नहीं सकता और भैंस को उस छत पर ले जाकर घास खिलाता है, तो उससे बडा मूर्ख और कौन हो सकता है।

अकबर: और तीसरा मूर्ख?

बीरबल: जहाँपनाह अपने राज्य मे इतना काम है। पूरी नीति मुझे संभालनी है, फिर भी मैं मूर्खों को ढूढने में एक महीना बर्बाद कर रहा हूॅ इसलिये तीसरा मूर्ख मै ही हूँ।

अकबर: और चौथा मूर्ख?

बीरबल: जहाँपनाह पूरे राज्य की जिम्मेदारी आप के ऊपर है। दिमाग वालों से ही सारा काम होने वाला है। मूर्खों से कुछ होने वाला नहीं है, फिर भी आप मूर्खों को ढूंढ रहे हैं। इस लिए चौथे मूर्ख जहाँपनाह आप हुए।

अकबर: और पांचवा मूर्ख?

बीरबल: जहाँ पनाह मैं बताना चाहता हूँ कि दुनिया भर के काम धाम को छोड़कर, घर परिवार को छोड़कर, पढाई लिखाई पर ध्यान ना देकर, यहाँ पूरा ध्यान लगा कर और पाँचवें मूर्ख को जानने के लिए जो इसे पढ़ रहा है वही पाँचवा मूर्ख है। इससे बडा मूर्ख दुनिया में कोई नहीं।
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 2 months ago
पेश है एक मजेदार किस्सा !

एक बार की बात है कि गुप्ताजी, एक
मारवाड़ी (बनिये) के यहां शादी में गए।

शादी का पंडाल बड़ा भव्य था और उसमें अंदर जाने के लिए 2 दरवाजे थे।

एक दरवाजे पर रिश्तेदार, दूसरे पर दोस्त लिखा था।
गुप्ताजी, बड़े फख्र से दोस्त वाले दरवाजे से अंदर गए।

आगे फिर 2 दरवाजे थे,
एक पर महिला, दूसरे पर पुरुष लिखा था।
गुप्ताजी पुरुष वाले दरवाजे से अंदर गए।

वहां भी 2 दरवाजे और थे,
एक पर गिफ्ट (gift) देने वाला,
दूसरे पर बिना गिफ्ट (without-gift) वाले लिखा था।

गुप्ताजी को हर बार अपनी
मर्जी के दरवाजे से अंदर जाने में बड़ा मजा आ रहा था|

उसने ऐसा इंतजाम पहली बार देखा था |
गुप्ताजी बिना-गिफ्ट वाले दरवाजे से अंदर चले गए।

जब अंदर जाकर देखा तो गुप्ताजी बाहर गली में खड़े थे।
और वहॉं लिखा था… शर्म तो आ नहीं रही होगी,
बनिये की शादी और मुफ्त में रोटी खायेगा???
जा-जा बाहर जा और हवा खा..!!
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 2 months ago
- फ़ीस माफ़ी की अर्ज़ी! -

सेवा में,
श्री मान प्रधानाचार्य
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय

विषय: फ़ीस माफ़ी हेतु।

महोदयजी,

उपरोक्त विषय में आप से निवेदन है कि कल मैं घर से फ़ीस के लिए 500 ₹ ले कर निकला था, मगर रास्ते में मेरी गर्लफ्रेंड मिल गई तो उसे पिज्ज़ा हट ले जाना पड़ा। वहाँ वो 500 ₹ खर्चा हो गए।

वहीं मैंने देखा आप भी पूजा मैडम को अपने हाथ से पिज्जा खिला रहे थे जिसका वीडियो साथ संलग्न कर रहा हूँ।

आगे आप खुद समझदार हैं।

मेरी फीस माफ या आपका पर्दा फाश।

आपका आज्ञाकारी छात्र
पप्पू
Himaŋshʋ Gʋpta: 4 months ago

पत्नी जब मायके जाती है और फिर जब पति कि याद आती है तो कैसे रोमांटिक sms भेजती है देखिये।

"मेरी मोहब्ब्त को अपने दिल में ढूंढ लेना;
और हाँ, आंटे को अच्छी तरह गूँथ लेना!

मिल जाए अगर प्यार तो खोना नहीं;
प्याज़ काटते वक्त बिलकुल रोना नहीं!

मुझसे रूठ जाने का बहाना अच्छा है;
थोड़ी देर और पकाओ आलू अभी कच्चा है!

मिलकर फिर खुशियों को बाँटना है;
टमाटर जरा बारीक़ ही काटना है!

लोग हमारी मोहब्ब्त से जल न जाएं;
चावल टाइम पे देख लेना कहीं गल न जाएं!

कैसी लगी हमारी ग़जल बता देना;
नमक कम लगे तो और मिला लेना!
Himaŋshʋ Gʋpta: 4 months ago
एक बार की बात है कि गुप्ता जी, एक मारवाड़ी (बनिये) के यहाँ शादी में गए। शादी का पंडाल बड़ा भव्य था और उसमें अंदर जाने के लिए 2 दरवाजे थे।

एक दरवाजे पर रिश्तेदार, दूसरे पर दोस्त लिखा था। गुप्ता जी, बड़े फख्र से दोस्त वाले दरवाजे से अंदर गए।

आगे फिर 2 दरवाजे थे, एक पर महिला, दूसरे पर पुरुष लिखा था। गुप्ता जी पुरुष वाले दरवाजे से अंदर गए।

वहाँ भी 2 दरवाजे और थे, एक पर गिफ्ट देने वाला, दूसरे पर बिना गिफ्ट वाले लिखा था।

गुप्ता जी को हर बार अपनी मर्जी के दरवाजे से अंदर जाने में बड़ा मजा आ रहा था। उसने ऐसा इंतजाम पहली बार देखा था।

गुप्ता जी बिना-गिफ्ट वाले दरवाजे से अंदर चले गए।

जब अंदर जाकर देखा तो गुप्ता जी बाहर गली में खड़े थे और वहॉं लिखा था... शर्म तो आ नहीं रही होगी, मारवाड़ी की शादी और मुफ्त में रोटी खायेगा? जा-जा बाहर जा और हवा खा।
Himaŋshʋ Gʋpta: 7 months ago
ट्रैफिक इंस्पेक्टर संता पंजाब हाईवे पर अकेले अपनी मोटरसाइकल पर बैठा था…!

तभी हरियाणा से आती हुयी एक कार ने बॉर्डर क्रॉस किया…!!

संता ने रुकने का इशारा किया…✋
और जब कार रुकी तो टहलता हुआ ड्राइवर की खिड़की पर दस्तक दिया…!

एक नवयुवक जो गाड़ी चला रहा था…
उसने शीशा नीचा कर सर बाहर निकाल कर पूछा:
“क्या बात है इंस्पेक्टर…?”

संता ने एक झापड़ उसके गाल पर रसीद किया…
युवक: “अरे, मारा क्यों…?”
संता: “जब पंजाब पुलिस का ट्रैफिक इंस्पेक्टर संता किसी गाड़ी को रुकने कहता है…
तो ड्राइवर को गाड़ी के कागजात अपने हाथ में रखा हुआ होना चाहिए…!”

युवक: “सारी इंस्पेक्टर…….
मैं पहली बार पंजाब आया हूँ….!”

फिर उसने ग्लव कंपार्टमेंट से पेपर्स निकाल कर दिखाये..!

संता ने पेपर्स का मुआयना किया फिर बोला:
“ठीक है….रख लो….!”

फिर घूमकर पैसेन्जर सीट की ओर गया और शीशा ठकठकाया…!!

पैसेन्जर सीट पर बैठा दूसरा युवक शीशा गिराकर सर बाहर निकाल कर पूछा :-
“हाँ बोलिए….?”

तड़ाक…!
एक झापड़ संता ने उसे भी मारा..!

“अरे ….! मैंने क्या किया …?”

संता: “ये तुम्हारी हेकड़ी उतारने के लिए…!”

युवक:- “पर मैंने तो कोई हेकड़ी नहीं दिखाई…?”

संता :- “अभी नहीं दिखाई, पर मैं जानता हूँ….
एक किलोमीटर आगे जाने के बाद तुम अपने दोस्त से कहते
“वो दो कौड़ी का इंस्पेक्टर मुझे मारा होता…. तो बताता….!” ->
Himaŋshʋ Gʋpta: 8 months ago
शहर के सबसे बड़े बैंक में एक बार एक बुढ़िया आई ।
उसने मैनेजर से कहा :- “मुझे इस बैंक में कुछ रुपये जमा करने हैं”

मैनेजर ने पूछा :- कितने हैं ?

वृद्धा बोली :- होंगे कोई दस लाख ।

मैनेजर बोला :- वाह क्या बात है, आपके पास तो काफ़ी पैसा है, आप करती क्या हैं ?

वृद्धा बोली :- कुछ खास नहीं, बस शर्तें लगाती हूँ ।

मैनेजर बोला :- शर्त लगा-लगा कर आपने इतना सारा पैसा कमाया है ? कमाल है…

वृद्धा बोली :- कमाल कुछ नहीं है, बेटा, मैं अभी एक लाख रुपये की शर्त लगा सकती हूँ कि तुमने अपने सिर पर विग लगा रखा है ।

मैनेजर हँसते हुए बोला :- नहीं माताजी, मैं तो अभी जवान हूँ और विग नहीं लगाता ।

तो शर्त क्यों नहीं लगाते ? वृद्धा बोली ।

मैनेजर ने सोचा यह पागल बुढ़िया खामख्वाह ही एक लाख रुपये गँवाने पर तुली है, तो क्यों न मैं इसका फ़ायदा उठाऊँ… मुझे तो मालूम ही है कि मैं विग नहीं लगाता ।

मैनेजर एक लाख की शर्त लगाने को तैयार हो गया ।

वृद्धा बोली :- चूँकि मामला एक लाख रुपये का है, इसलिये मैं कल सुबह ठीक दस बजे अपने वकील के साथ आऊँगी और उसी के सामने शर्त का फ़ैसला होगा ।

मैनेजर ने कहा :- ठीक है, बात पक्की…

मैनेजर को रात भर नींद नहीं आई.. वह एक लाख रुपये और बुढ़िया के बारे में सोचता रहा ।

अगली सुबह ठीक दस बजे वह बुढ़िया अपने वकील के साथ मैनेजर के केबिन में पहुँची और कहा :- क्या आप तैयार हैं ?

मैनेजर ने कहा :- बिलकुल, क्यों नहीं ?

वृद्धा बोली :- लेकिन चूँकि वकील साहब भी यहाँ मौजूद हैं और बात एक लाख की है, अतः मैं तसल्ली करना चाहती हूँ कि सचमुच आप विग नहीं लगाते, इसलिये मैं अपने हाथों से आपके बाल नोचकर देखूँगी ।

मैनेजर ने पल भर सोचा और हाँ कर दी, आखिर मामला एक लाख का था ।
वृद्धा मैनेजर के नजदीक आई और धीर-धीरे आराम से मैनेजर के बाल नोचने लगी । उसी वक्त अचानक पता नहीं क्या हुआ, वकील साहब अपना माथा दीवार पर ठोंकने लगे ।

मैनेजर ने कहा :- अरे.. अरे.. वकील साहब को क्या हुआ ?

वृद्धा बोली :- कुछ नहीं, इन्हें सदमा लगा है, मैंने इनसे पाँच लाख रुपये की शर्त लगाई थी कि आज सुबह दस बजे मैं शहर के सबसे बड़े बैंक के मैनेजर के बाल नोचकर दिखा दूँगी ।

ठोको ताली – एक दम ताजा है…!!