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Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 2 months ago
एक मोटे आदमी ने न्यूज पेपर में विज्ञापन देखा
“एक सप्ताह में 5 किलो वजन कम कीजिये।” ⚖⚖

उसने उस विज्ञापन वाली कम्पनी में फोन किया तो एक महिला ने जवाब दिया और कहा :
“कल सुबह 6 बजे तैयार रहिए।”

अगली सुबह उस मोटे ने दरवाजा खोला तो देखा कि एक
खूबसूरत युवती जागिंग सूट और शूज पहने बाहर तैयार खड़ी है।

युवती बोली :-
मुझे पकड़ो और मुझे किस कर लो ये कह कर युवती दौड़ पड़ी।

मोटू भी पीछे दौड़ा मगर उसे पकड़ नहीं पाया।
पूरे हफ्ते रोज मोटू ने उसे पकड़ने का प्रयास किया लेकिन उस
युवती को पकड़ नही पाया। और उसका 5 किलो वजन कम
हो गया।

फिर मोटू ने 10 किलो वजन कम करने वाले प्रोग्राम की बात की।

अगली सुबह 6 बजे उसने दरवाजा खोला तो देखा कि:
पहले वाली से भी खूबसूरत युवती जागिंग सूट और शूज में खड़ी है।

युवती बोली :-
मुझे पकड़ो और मुझे किस करलो और इस हफ्ते मोटू का 10 किलो वजन घट गया।

मोटू ने सोचा वाह क्या बढ़िया प्रोग्राम है।
क्यूँ ना 25 किलो वाला प्रोग्राम आजमाया जाए।
उसने 25 किलो वाले प्रोग्राम के लिए फोन किया।
तो महिला ने जवाब दिया और कहा कि :
“क्या आपका इरादा पक्का है? क्योंकि ये प्रोग्राम थोड़ा कठिन है।”

मोटू बोला :- “हाँ।”

अगली सुबह 6 बजे मोटू ने दरवाजा खोला तो देखा कि
दरवाजे पर जागिंग सूट और शूज पहने एक काली भुजंग लड़की
खडी है ……

लड़की बोली :
मैंने तुम्हे पकड़ लिया तो मैं तुम्हें किस करूँगी,

बस तो फिर क्या अब तो भाग मिल्खा भाग…!!
Anvi Srivastava: 3 months ago

एक बार चम्पकलाल ने एक कबूतर का शिकार किया। वह कबूतर जाकर एक खेत में गिरा। जब चम्पकलाल उस खेत में कबूतर को उठाने पहुंचा तभी एक किसान वहां आया और चम्पकलाल को पूछने लगा कि वह उसकी प्रोपर्टी में क्या कर रहा है?

चम्पकलाल ने कबूतर को दिखाते हुए कहा - `मैंने इस कबूतर को मारा और ये मर कर यहाँ गिर गया मैं इसे लेने आया हूँ!`

किसान - `ये कबूतर मेरा है क्योंकि ये मेरे खेत में पड़ा है!`

चम्पकलाल - `क्या तुम जानते हो तुम किससे बात कर रहे हो?`

किसान - `नहीं मैं नहीं जानता और मुझे इससे भी कुछ नहीं लेना है कि तुम कौन हो!`

चम्पकलाल - `मैं हाईकोर्ट का वकील हूँ, अगर तुमने मुझे इस कबूतर को ले जाने से रोका तो मैं तुम पर ऐसा मुकदमा चलाऊंगा कि तुम्हें तुम्हारी जमीन जायदाद से बेदखल कर दूंगा और रास्ते का भिखारी बना दूंगा!`

किसान ने कहा - `हम किसी से नहीं डरते ... हमारे गाँव में तो बस एक ही कानून चलता है... लात मारने वाला!`

चम्पकलाल - `ये कौनसा क़ानून है ... मैंने तो कभी इसके बारे में नहीं सुना!`

किसान ने कहा -`मैं तुम्हें तीन लातें मारता हूँ अगर तुम वापिस उठकर तीन लातें मुझे मार पाओगे तो तुम इस कबूतर को ले जा सकते हो!`

चम्पकलाल ने सोचा ये ठीक है ये मरियल सा आदमी है, इसकी लातों से मुझे क्या फर्क पड़ेगा ! ये सोचकर उसने कहा - `ठीक है मारो!`

किसान ने बड़ी बेरहमी से चम्पकलाल को पहली लात टांगों के बीच में मारी जिससे चम्पकलाल मुहं के बल झुक गया!

किसान ने दूसरी लात चम्पकलाल के मुहं पर मारी जिसके पड़ते ही वह जमीन पर गिर गया!

तीसरी लात किसान ने चम्पकलाल की पसलियों पर मारी।

बड़ी देर बाद चम्पकलाल उठा और जब लात मारने के लायक हुआ तो किसान से बोला - `अब मेरी बारी है!`

किसान - `चलो छोड़ो यार! ये कबूतर तुम ही रखो!
Anvi Srivastava: 3 months ago
अकबर और बीरबल सभा मे बैठ कर आपस में बात कर रहे थे। अकबर ने बीरबल को आदेश दिया कि मुझे इस राज्य से 5 मूर्ख ढूंढ कर दिखाओ। बादशाह का हुक्म सुन बीरबल ने खोज शुरू की।

एक महीने बाद बीरबल वापस आये लेकिन सिर्फ 2 लोगों के साथ।

अकबर: मैने तो 5 मूर्ख लाने के लिये कहा था।

बीरबल: जी हुजुर लाया हूँ, मुझे पेश करने का मौका दिया जाये।

अकबर: ठीक है।

बीरबल: हुजुर यह पहला मूर्ख है। मैने इसे बैलगाडी पर बैठ कर भी बैग सिर पर ढोते हुए देखा और पूछने पर जवाब मिला कि कहीं बैल के उपर ज्यादा भार ना हो जाए, इसलिये बैग सिर पर ढो रहा हूँ। इस हिसाब से यह पहला मूर्ख है।

दूसरा मूर्ख यह आदमी है जो आप के सामने खडा है। मैने देखा इसके घर के ऊपर छत पर घास निकली थी। अपनी भैंस को छत पर ले जाकर घास खिला रहा था। मैने देखा और पूछा तो जवाब मिला कि घास छत पर जम जाती है तो भैंस को ऊपर ले जाकर घास खिला देता हूँ। हुजुर, जो आदमी अपने घर की छत पर जमी घास को काटकर फेंक नहीं सकता और भैंस को उस छत पर ले जाकर घास खिलाता है, तो उससे बडा मूर्ख और कौन हो सकता है।

अकबर: और तीसरा मूर्ख?

बीरबल: जहाँपनाह अपने राज्य मे इतना काम है। पूरी नीति मुझे संभालनी है, फिर भी मैं मूर्खों को ढूढने में एक महीना बर्बाद कर रहा हूॅ इसलिये तीसरा मूर्ख मै ही हूँ।

अकबर: और चौथा मूर्ख?

बीरबल: जहाँपनाह पूरे राज्य की जिम्मेदारी आप के ऊपर है। दिमाग वालों से ही सारा काम होने वाला है। मूर्खों से कुछ होने वाला नहीं है, फिर भी आप मूर्खों को ढूंढ रहे हैं। इस लिए चौथे मूर्ख जहाँपनाह आप हुए।

अकबर: और पांचवा मूर्ख?

बीरबल: जहाँ पनाह मैं बताना चाहता हूँ कि दुनिया भर के काम धाम को छोड़कर, घर परिवार को छोड़कर, पढाई लिखाई पर ध्यान ना देकर, यहाँ पूरा ध्यान लगा कर और पाँचवें मूर्ख को जानने के लिए जो इसे पढ़ रहा है वही पाँचवा मूर्ख है। इससे बडा मूर्ख दुनिया में कोई नहीं।
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 4 months ago
पेश है एक मजेदार किस्सा !

एक बार की बात है कि गुप्ताजी, एक
मारवाड़ी (बनिये) के यहां शादी में गए।

शादी का पंडाल बड़ा भव्य था और उसमें अंदर जाने के लिए 2 दरवाजे थे।

एक दरवाजे पर रिश्तेदार, दूसरे पर दोस्त लिखा था।
गुप्ताजी, बड़े फख्र से दोस्त वाले दरवाजे से अंदर गए।

आगे फिर 2 दरवाजे थे,
एक पर महिला, दूसरे पर पुरुष लिखा था।
गुप्ताजी पुरुष वाले दरवाजे से अंदर गए।

वहां भी 2 दरवाजे और थे,
एक पर गिफ्ट (gift) देने वाला,
दूसरे पर बिना गिफ्ट (without-gift) वाले लिखा था।

गुप्ताजी को हर बार अपनी
मर्जी के दरवाजे से अंदर जाने में बड़ा मजा आ रहा था|

उसने ऐसा इंतजाम पहली बार देखा था |
गुप्ताजी बिना-गिफ्ट वाले दरवाजे से अंदर चले गए।

जब अंदर जाकर देखा तो गुप्ताजी बाहर गली में खड़े थे।
और वहॉं लिखा था… शर्म तो आ नहीं रही होगी,
बनिये की शादी और मुफ्त में रोटी खायेगा???
जा-जा बाहर जा और हवा खा..!!
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 5 months ago
- फ़ीस माफ़ी की अर्ज़ी! -

सेवा में,
श्री मान प्रधानाचार्य
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय

विषय: फ़ीस माफ़ी हेतु।

महोदयजी,

उपरोक्त विषय में आप से निवेदन है कि कल मैं घर से फ़ीस के लिए 500 ₹ ले कर निकला था, मगर रास्ते में मेरी गर्लफ्रेंड मिल गई तो उसे पिज्ज़ा हट ले जाना पड़ा। वहाँ वो 500 ₹ खर्चा हो गए।

वहीं मैंने देखा आप भी पूजा मैडम को अपने हाथ से पिज्जा खिला रहे थे जिसका वीडियो साथ संलग्न कर रहा हूँ।

आगे आप खुद समझदार हैं।

मेरी फीस माफ या आपका पर्दा फाश।

आपका आज्ञाकारी छात्र
पप्पू
Himaŋshʋ Gʋpta: 6 months ago

पत्नी जब मायके जाती है और फिर जब पति कि याद आती है तो कैसे रोमांटिक sms भेजती है देखिये।

"मेरी मोहब्ब्त को अपने दिल में ढूंढ लेना;
और हाँ, आंटे को अच्छी तरह गूँथ लेना!

मिल जाए अगर प्यार तो खोना नहीं;
प्याज़ काटते वक्त बिलकुल रोना नहीं!

मुझसे रूठ जाने का बहाना अच्छा है;
थोड़ी देर और पकाओ आलू अभी कच्चा है!

मिलकर फिर खुशियों को बाँटना है;
टमाटर जरा बारीक़ ही काटना है!

लोग हमारी मोहब्ब्त से जल न जाएं;
चावल टाइम पे देख लेना कहीं गल न जाएं!

कैसी लगी हमारी ग़जल बता देना;
नमक कम लगे तो और मिला लेना!
Himaŋshʋ Gʋpta: 6 months ago
एक बार की बात है कि गुप्ता जी, एक मारवाड़ी (बनिये) के यहाँ शादी में गए। शादी का पंडाल बड़ा भव्य था और उसमें अंदर जाने के लिए 2 दरवाजे थे।

एक दरवाजे पर रिश्तेदार, दूसरे पर दोस्त लिखा था। गुप्ता जी, बड़े फख्र से दोस्त वाले दरवाजे से अंदर गए।

आगे फिर 2 दरवाजे थे, एक पर महिला, दूसरे पर पुरुष लिखा था। गुप्ता जी पुरुष वाले दरवाजे से अंदर गए।

वहाँ भी 2 दरवाजे और थे, एक पर गिफ्ट देने वाला, दूसरे पर बिना गिफ्ट वाले लिखा था।

गुप्ता जी को हर बार अपनी मर्जी के दरवाजे से अंदर जाने में बड़ा मजा आ रहा था। उसने ऐसा इंतजाम पहली बार देखा था।

गुप्ता जी बिना-गिफ्ट वाले दरवाजे से अंदर चले गए।

जब अंदर जाकर देखा तो गुप्ता जी बाहर गली में खड़े थे और वहॉं लिखा था... शर्म तो आ नहीं रही होगी, मारवाड़ी की शादी और मुफ्त में रोटी खायेगा? जा-जा बाहर जा और हवा खा।
Himaŋshʋ Gʋpta: 9 months ago
ट्रैफिक इंस्पेक्टर संता पंजाब हाईवे पर अकेले अपनी मोटरसाइकल पर बैठा था…!

तभी हरियाणा से आती हुयी एक कार ने बॉर्डर क्रॉस किया…!!

संता ने रुकने का इशारा किया…✋
और जब कार रुकी तो टहलता हुआ ड्राइवर की खिड़की पर दस्तक दिया…!

एक नवयुवक जो गाड़ी चला रहा था…
उसने शीशा नीचा कर सर बाहर निकाल कर पूछा:
“क्या बात है इंस्पेक्टर…?”

संता ने एक झापड़ उसके गाल पर रसीद किया…
युवक: “अरे, मारा क्यों…?”
संता: “जब पंजाब पुलिस का ट्रैफिक इंस्पेक्टर संता किसी गाड़ी को रुकने कहता है…
तो ड्राइवर को गाड़ी के कागजात अपने हाथ में रखा हुआ होना चाहिए…!”

युवक: “सारी इंस्पेक्टर…….
मैं पहली बार पंजाब आया हूँ….!”

फिर उसने ग्लव कंपार्टमेंट से पेपर्स निकाल कर दिखाये..!

संता ने पेपर्स का मुआयना किया फिर बोला:
“ठीक है….रख लो….!”

फिर घूमकर पैसेन्जर सीट की ओर गया और शीशा ठकठकाया…!!

पैसेन्जर सीट पर बैठा दूसरा युवक शीशा गिराकर सर बाहर निकाल कर पूछा :-
“हाँ बोलिए….?”

तड़ाक…!
एक झापड़ संता ने उसे भी मारा..!

“अरे ….! मैंने क्या किया …?”

संता: “ये तुम्हारी हेकड़ी उतारने के लिए…!”

युवक:- “पर मैंने तो कोई हेकड़ी नहीं दिखाई…?”

संता :- “अभी नहीं दिखाई, पर मैं जानता हूँ….
एक किलोमीटर आगे जाने के बाद तुम अपने दोस्त से कहते
“वो दो कौड़ी का इंस्पेक्टर मुझे मारा होता…. तो बताता….!” ->