Day Wishes - HindiJokes.Mobi
Anvi Srivastava: 2 months ago

एक बार चम्पकलाल ने एक कबूतर का शिकार किया। वह कबूतर जाकर एक खेत में गिरा। जब चम्पकलाल उस खेत में कबूतर को उठाने पहुंचा तभी एक किसान वहां आया और चम्पकलाल को पूछने लगा कि वह उसकी प्रोपर्टी में क्या कर रहा है?

चम्पकलाल ने कबूतर को दिखाते हुए कहा - `मैंने इस कबूतर को मारा और ये मर कर यहाँ गिर गया मैं इसे लेने आया हूँ!`

किसान - `ये कबूतर मेरा है क्योंकि ये मेरे खेत में पड़ा है!`

चम्पकलाल - `क्या तुम जानते हो तुम किससे बात कर रहे हो?`

किसान - `नहीं मैं नहीं जानता और मुझे इससे भी कुछ नहीं लेना है कि तुम कौन हो!`

चम्पकलाल - `मैं हाईकोर्ट का वकील हूँ, अगर तुमने मुझे इस कबूतर को ले जाने से रोका तो मैं तुम पर ऐसा मुकदमा चलाऊंगा कि तुम्हें तुम्हारी जमीन जायदाद से बेदखल कर दूंगा और रास्ते का भिखारी बना दूंगा!`

किसान ने कहा - `हम किसी से नहीं डरते ... हमारे गाँव में तो बस एक ही कानून चलता है... लात मारने वाला!`

चम्पकलाल - `ये कौनसा क़ानून है ... मैंने तो कभी इसके बारे में नहीं सुना!`

किसान ने कहा -`मैं तुम्हें तीन लातें मारता हूँ अगर तुम वापिस उठकर तीन लातें मुझे मार पाओगे तो तुम इस कबूतर को ले जा सकते हो!`

चम्पकलाल ने सोचा ये ठीक है ये मरियल सा आदमी है, इसकी लातों से मुझे क्या फर्क पड़ेगा ! ये सोचकर उसने कहा - `ठीक है मारो!`

किसान ने बड़ी बेरहमी से चम्पकलाल को पहली लात टांगों के बीच में मारी जिससे चम्पकलाल मुहं के बल झुक गया!

किसान ने दूसरी लात चम्पकलाल के मुहं पर मारी जिसके पड़ते ही वह जमीन पर गिर गया!

तीसरी लात किसान ने चम्पकलाल की पसलियों पर मारी।

बड़ी देर बाद चम्पकलाल उठा और जब लात मारने के लायक हुआ तो किसान से बोला - `अब मेरी बारी है!`

किसान - `चलो छोड़ो यार! ये कबूतर तुम ही रखो!
Anvi Srivastava: 2 months ago
अकबर और बीरबल सभा मे बैठ कर आपस में बात कर रहे थे। अकबर ने बीरबल को आदेश दिया कि मुझे इस राज्य से 5 मूर्ख ढूंढ कर दिखाओ। बादशाह का हुक्म सुन बीरबल ने खोज शुरू की।

एक महीने बाद बीरबल वापस आये लेकिन सिर्फ 2 लोगों के साथ।

अकबर: मैने तो 5 मूर्ख लाने के लिये कहा था।

बीरबल: जी हुजुर लाया हूँ, मुझे पेश करने का मौका दिया जाये।

अकबर: ठीक है।

बीरबल: हुजुर यह पहला मूर्ख है। मैने इसे बैलगाडी पर बैठ कर भी बैग सिर पर ढोते हुए देखा और पूछने पर जवाब मिला कि कहीं बैल के उपर ज्यादा भार ना हो जाए, इसलिये बैग सिर पर ढो रहा हूँ। इस हिसाब से यह पहला मूर्ख है।

दूसरा मूर्ख यह आदमी है जो आप के सामने खडा है। मैने देखा इसके घर के ऊपर छत पर घास निकली थी। अपनी भैंस को छत पर ले जाकर घास खिला रहा था। मैने देखा और पूछा तो जवाब मिला कि घास छत पर जम जाती है तो भैंस को ऊपर ले जाकर घास खिला देता हूँ। हुजुर, जो आदमी अपने घर की छत पर जमी घास को काटकर फेंक नहीं सकता और भैंस को उस छत पर ले जाकर घास खिलाता है, तो उससे बडा मूर्ख और कौन हो सकता है।

अकबर: और तीसरा मूर्ख?

बीरबल: जहाँपनाह अपने राज्य मे इतना काम है। पूरी नीति मुझे संभालनी है, फिर भी मैं मूर्खों को ढूढने में एक महीना बर्बाद कर रहा हूॅ इसलिये तीसरा मूर्ख मै ही हूँ।

अकबर: और चौथा मूर्ख?

बीरबल: जहाँपनाह पूरे राज्य की जिम्मेदारी आप के ऊपर है। दिमाग वालों से ही सारा काम होने वाला है। मूर्खों से कुछ होने वाला नहीं है, फिर भी आप मूर्खों को ढूंढ रहे हैं। इस लिए चौथे मूर्ख जहाँपनाह आप हुए।

अकबर: और पांचवा मूर्ख?

बीरबल: जहाँ पनाह मैं बताना चाहता हूँ कि दुनिया भर के काम धाम को छोड़कर, घर परिवार को छोड़कर, पढाई लिखाई पर ध्यान ना देकर, यहाँ पूरा ध्यान लगा कर और पाँचवें मूर्ख को जानने के लिए जो इसे पढ़ रहा है वही पाँचवा मूर्ख है। इससे बडा मूर्ख दुनिया में कोई नहीं।
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 2 months ago
पत्नी : सुनो जी, महिलाओं को भी अब शनि मंदिर में प्रवेश का अधिकार मिल गया है.

पति : बहुत बढ़िया हुआ, अब शनि देव को भी मालूम पड़ेगा कि साढ़ेसाती किसे कहते हैं...
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 2 months ago
हक़ीक़त हो तुम कैसे तुझे सपना कहूँ;
तेरे हर दर्द को मैं अपना कहूँ;
सब कुछ क़ुर्बान है मेरे यार पर;
कौन है तेरे सिवा जिसे मैं अपना कहूँ!
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 2 months ago
मेरी पलकों की नमी इस बात की गवाह है;
मुझे आज भी तुमसे मोहब्बत बेपनाह है!
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 2 months ago

मोदी जी सिर्फ अच्छे दिन ही लायेंगे ….

अच्छी रातों की व्यवस्था खुद ही करनी होगी …।।

– सनी लिओन ( वरिष्ठ समाजसेविका )
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 2 months ago
दुकानदार : क्या चाहिए ?

ग्राहक : मुझे बीवी से लड़ने के लिए ताकत चाहिए, हिम्मत चाहिए ,अकल भी चाहिए ।

दुकानदार : साहब को एक क्वार्टर दो, सोडा दो
और मुँगदाल का पैकेट दो पाँच वाला।
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 2 months ago
तो बंधुओ साल का आखिरी दिन आखिर आ ही गया…

पिछले साल 1 January के दिन एक आदमी ने मुझे डिनर खिलाया था और उसे साल के दूसरे ही दिन प्रमोशन मिल गया…

इसी तरह से एक ने मुझे नए साल पे गिफ्ट कार्ड दिया और उसे लॉटरी में एक घर मिला…

एक ने मुझे शॉपिंग का वाउचर दिया और उसे सिंगापूर और मलेशिया का फ्री ट्रिप मिला…

एक दोस्त ने घडी गिफ्ट किया और आज उसका समय इतना अच्छा हो गया के आज वो अमेरिका में अपना रेस्टोरेंट खोल चूका है…

आप भी इस नए साल अपने लक को इसी तरह दिन दुगुना और रात चौगुनी कर सकते हैं!

एक ने ह्विस्की की बोतल में रंगीन पानी भर कर शानपत्ती दिखाई
आज बेचारा कबाड़ी के यहां शीशी अलग डक्कन अलग छांट रहा है

दुसरे ने इग्नोर किया
तो आज वो ढाबे में बर्तन धोता है…

ज़िन्दगी आपकी,
फैसला आपका