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Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 24 days ago
आज का महाज्ञान:
इंसान को जितनी चादर हो, उतने ही पैर पसारने चाहिए नहीं तो ठंडी लगती है भाई!
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 25 days ago

तन्हाई की यह कुछ ऐसी अजब रात है;
तुझसे जुडी हुई हर याद मेरे साथ है;
तड़प रहा है तनहा चाँद बिना चांदनी के;
इस अंधेरी रात में आज कुछ और बात है!
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 25 days ago

लाख समझाया उसे ना मिला करो गैरों से;
वो हस कर कहने लगे तुम भी तो पहले गैर थे!
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 25 days ago

मुझे खामोश़ देख कर इतना क्यों हैरान होते हो ऐ दोस्तो;
कुछ नहीं हुआ है बस भरोसा करके धोखा खाया है!
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 25 days ago

क्यों तुझे पाने के लिये मिन्नते करूँ;
मुझे तुझसे मोहब्बत है कोई मतलब तो नहीं!
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 25 days ago

ताल्लुक़ टूट कर बाद में जो कुछ भी रह गये;
मगर मोहब्बत में वो पहला मुस्कुराना हमेशा याद आता है!
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 25 days ago

फ़क्र ये कि तुम मेरे हो;
फ़िक्र ये कि पता नहीं कब तक।
Ür's Himaŋshʋ Gʋpta: 25 days ago

अक्सर वो फैंसले मेरे हक़ में गलत हुए;
जिन फैंसलों के नीचे तेरे दस्तखत हुए!